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Aditya Alakh Niranjan Скачать

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Aditya

Alakh Niranjan

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Текст песни

माया लेके आए मच्छिंदर
झोली में युग,भस्म,अंबर
रुद्र माला,वैराग्य छाया
भोगो,मोक्ष का भेद दिखाया

नाथ पंथ के दादा गुरु
काया पलटे,सत्य शुरू
अलख निरंजन,आदेश!
एक ही संदेश
आदेश!

काल-कर्म-क्लेश,भस्म
जोगी निर्विशेष
आदेश-आदेश
आगे- आगे गोरख जागे
अलख निरंजन (अलख निरंजन)

काल का लेखा,पल में जले
अघोर अग्नि में,भाग्य ढले
ॐ रं रं रं, हूं- हूं फट्
क्रीं कालाग्नये आदेश तत्

आदेश! अलख निरंजन,आदेश! आदेश!
जड से चेतन,टूटे हर बंधन
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शब्द सांचा पिंड कंचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा

भगवा वेश, हाथ में खप्पर
भैरव रूप, शिव का जपकर
जहाँ- जहाँ जाऊँ नगर-डगर
लगे वहाँ फिर जोगी मेला
शिव का धुना,गोरख तापे
काल कंटक थर-थर कांपे
हूं फट्!,हूं फट्!,हूं फट्!

नव नाथ करें मेरी रक्षा
चारों युग में साथ की यक्षा
हनुमंत बलवान,करे भय का नाश
रोग–शोक कटे पल में आज
रिद्धि- सिद्धि आंगन आए
अन्नपूर्णा अन्न बरसाये

मैं ना देह,मैं ना नाम
मैं केवल ज्वाला, केवल राम
शब्द सांचा,पिंड काचा
ईश्वरो वाचा, सत्य राचा
जो कहा सो हुआ
नाथ की वाणी ब्रह्म सत्य
ॐ, क्रीं हूं फट्
काल,कर्म,क्लेश,भस्म
स्वाहा!
आदेश!
आदेश!
आदेश! आदेश!
आदेश!

ॐ गुरु जी
गोरख जती,मच्छेन्द्र का चेला
शिव के रूप में दिखे अलबेला
कानों कुंडल, गले में नादी
हाथ त्रिशूल,नाथ हैं आदि
अलख पुरुष को करूँ आदेश
जन्म-जन्म के काटो कलेश

भगवा वेश हाथ में खप्पर
भैरव शिव का चेला
जहाँ-जहाँ जाऊं नगर डगर
लगे वहां फिर मेला
शिव का धुना गोरख तापे
काल कंटक थर-थर कांपे

मेरी रक्षा करे नव नाथ
राम दूत,हनुमंत बलवंत
रिद्धि- सिद्धि आंगन विराजे
माई अन्नपूर्णा सुखवंत
शब्द सांचा पिंड काचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा

आदेश!अलख निरंजन,आदेश! आदेश!
सब में समाया एक ही प्रकाश
ना ऊँचा कोई, ना कोई नीचा
एक समान ज्योत का आश
आदेश! अलख निरंजन,आदेश! आदेश!
शिव में जीव, सहज ही लीन
अनंत से अनंत तक
पाये शिवत्व योगी प्रवीण

घट में ज्योत है
ज्योत में घट
जो खोजे बाहर
वो भीतर ही बसे
ॐ शिवगोरक्ष
आदेश!
आदेश!
आदेश! (आदेश!)

आदेश!

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